मसालों के महाराजा की कहानी !!SUCCESS STORY OF MDH OWNER!!

 हेलो मैं हिमांशी आज मैं आपको उस इंसान के बारे में बताने जा रही हूं में जिस इंसान ने अपने परिवार का पेट भरने के लिए बहुत मेहनत की जैसे कि उन्होंने तांगा चलाया,दो -दो पैसों में मेहंदी की छोटी-छोटी पूर्णिया बेजी.वह इतनी मेहनत करके 2017 में FMCG मैं सबसे ज्यादा तनख्वाह पाने वाले सीईओ(CEO) बने थे.आज इनको देश का बच्चा-बच्चा जानता है और इन्होंने मेहनत करके बहुत नाम कमा लिया है तो आइए जानते हैं इनके बारे 


नाम-महाशय धर्मपाल गुलाटी

जन्मतिथि-27 मार्च,1923

माता का नाम- चन्न देवी

पिता का नाम- महाशय चुन्नी लाल

मृत्यु तिथि-3 दिसंबर 2020

 

मसालों के महाराजा की कहानी SUCCESS STORY OF MDH OWNER

महाशय  धर्मपाल गुलाटी अपने काम के साथ बड़े ईमानदार थे इनकी लॉयल्टी और इमानदारी सिर्फ एक प्रोडक्ट के साथ रही थी और उस प्रोडक्ट का नाम था एम डी एच मसाले जैसा कि आप देख सकते हो काफी लोग अपनी ऐड में हीरो हीरोइन को बदलते रहते हैं लेकिन धरमपाल गुलाटी जी ने ऐसा नहीं किया वह हमेशा अपने काम के प्रति ईमानदार रहें.धर्मपाल गुलाटी जी एक ब्रांड के रूप में  मशहूर हुए जैसे कि आप पेप्सी, कोका कोला के स्टिकर को देखकर पहचान जाते है.


वैसे ही धर्मपाल गुलाटी जी एमडीएच ऐसे  मशहूर प्रोडक्ट की पहचान बन गए . लोग उनको उनके चश्मे और उनकी मूछों और पगड़ी से जानते हैं उनके गले में हमेशा सफेद कलर की मोतियों वाली माला रहती थी.आज देश का बच्चा बच्चा होने तक जानता है.उन्हें बहुत बार टीवी पर दिखाया गया कभी बड़ों को आशीर्वाद देते हुए दिखे और कभी बच्चों के साथ दादू बन कर  दिखे. कभी अपने मसालों के बारे में बताते हुए दिखे.


आइए जानते हैं एमडीएचकी फुल फॉर्म के बारे में-:

एमडीएच का मतलब मिर्चि या मसाले नहीं है आजकल हम सब लोगों को एमडीएच का सिर्फ एक ही मतलब पता हैमिर्च मसालों की चीज है लेकिन ऐसा नहीं है एमडीएच का मतलब है महाशिया दी हट्टी यह जो हट्टी शब्द है इसको हॉट से लिया गया है हॉट का मतलब यह है सामान खरीदने की जगह जैसे कि दुकान,बाजार आदि.

जैसे कि जो प्यार होता है वह मसालों में बिकता है ना की कोई दुकान या बाजारों में नहीं जैसे कि किसी की दुकान महाशय से लिंक या फैमिली से है तो उसका नाम महाशय दी हट्टी या महाशय एंड संस या किराने की दुकान भी हो सकती है.


आइए उनके स्कूल छोड़ने और कैरियर बनाने तक का सफर जानते हैं-

जब धर्मपाल गुलाटी जी पांचवी कक्षा में थे तो उनके सर ने उन्होंने चांटा मार दिया था.अगले दिन से उन्होंने स्कूल जाना बंद कर दिया.यह देखकर उनके पिताजी को काफी चिंता होने लगी कि यह कुछ कमाई या पढ़ाई नहीं करेगा तो आगे क्या होगा तो उनके पिताजी ने उनको बोला कि कल से तुम लकड़ी का काम सीखने जाओगे उन्होंने 7-8  महीने वहां पर काम करके छोड़ दिया.

उन्होंने काफी काम करने की कोशिश की जैसे कि चावलों को बेचना या किसी साबुन को बेचना लेकिन उनका हाथ कहीं नहीं जम पाया. यह देखकर उनके पिताजी ने सोचा कि इसकी शादी कर देते हैं क्या पता शादी के बाद थोड़ी जिम्मेदारियां इसको महसूस होने लगे.

फिर उनके 18 साल होते ही उनकी शादी कर दी गई और उनके पिता ने उनको अपनी ही दुकान पर रख लिया क्योंकि उनके पिता ने देखा था कि उन्होंने काफी कोशिशें की हर जगह काम करने की लेकिन उनसे जमा नहीं इसीलिए उन्होंने अपनी दुकान पर रखा ताकि वह उनसे दूर ना जा पाए.यह दुकान उनके पिताजी ने 4 साल पहले 1919 मैं खोली थी और उनकी दुकान का नाम था महाशिया दी हट्टी.


थोड़े समय बाद महाशय वहां से निकलकर पंजाब अमृतसर आ गए उनके पास उस वक्त कुछ भी नहीं था वह अपने पिता का काम छोड़ कर आ गए थे जब वह पंजाब पहुंचे उन्हें पता चला कि उनका एमडीएस काफी मशहूर हो चुका है लेकिन वह फिर उसके बाद भी काम की तलाश में निकल पड़े और वह अपनी बहन के ससुराल आ गए. उनकी बहन का ससुराल दिल्ली के करोल बाग में था.जब उनके पिताजी को पता चला तो उनके पिताजी ने उनको थोड़े पैसे भिजवाए फिर उन पैसों से उन्होंने एक तांबा खरीदा.


उस तांबे का इस्तेमाल करके वह लोगों को करोल बाग से लेकर सीपी तक छोड़ कर आया करते थे ऐसे ही वह रोजाना यही किया करते थे थोड़े समय के बाद उन्होंने यह काम भी छोड़ दिया और अपना तांबा बेच दिया.फिर उन्होंने सोचा अब क्या करा जाए? फिर वह अपने पिता की दुकान के बारे में सोचने लगे मसालों के बारे में सोचने लगे उन्हें मसालों की सुगंध आने लगी. वह उस वक्त अपने अतीत के बारे में सोच रहे थे कि मैं कैसे अपने पिताजी के साथ मिलकर मसालों  और मेहंदी की छोटी छोटी  पूर्णिया भेजा करता था.और उनकी उस  पूर्णिया कि बाजार में कितनी चर्चा होती थी.


उनको और उनके परिवार वालों को देगी मिर्च वाले के नाम से जाना जाता था.फिर उन्होंने एक सड़क के किनारे झोपड़ी के अंदर दुकान लगाकर मसाले बेचने शुरू किए.और उन्होंनेइस छोटी सी दुकान का नाम  महाशिया दी हट्टी रखा.और फिर यही नाम लोगों की जुबान पर चढ़ने लगा.


इनके मसालों का नाम 'पाल दी धनिया' या 'पाल दे मिर्च' जैसा था और इनका पैकिंग का स्टाइल काफी नया था और काफी लोग मसालों को पिसवा कर रख लिया करते थे क्योंकि उस वक्त पैकिंगइतनी मशहूर नहीं थी तो लोग पैकिंग करवाना ज्यादा पसंद नहीं करते थे.और उन्होंने अपना एक विज्ञापन उर्दू अखबार में दिया था.अब इस विज्ञापन के बाद उनका काम काफी बढ़ने लगा उन्हें एक बड़ी दुकान की जरूरत थी उन्होंने चांदनी चौक जैसी जगह पे एक बड़ी दुकान किराए पर ले ली और उन्होंने एक स्टोर खोल लिया.और वही स्टोर थोड़े समय के बाद अपने छोटे भाई के नाम कर दिया.


थोड़े समय बाद उन्होंने मसाले को पीसने वाली एक छोटी सी मशीन खरीद ली.धीरे-धीरे करके उन्होंने अपनी एक ब्रांच दिल्ली जैसे शहर में खोल दी.उनकी पहली ब्रांच पंजाबी बाग में और खारी बावली जैसी जगह पर खुलती गई.आज के समय में उनकी दुबई जैसे अन्य जगहों पर इनके मसालों का इस्तेमाल होता है इनका 100 से ज्यादा कंट्री में मसाले बेचे जाते हैं. जैसे कि एमडीएच की मिर्च,देगी मसाला,चाट मसाला ऐसे अन्य मसाले बेचे जाते हैं. इनके लगभग हर महीने एक करोड़ से ज्यादा मसालों के पैकेट बेचे जाते हैं.और वह इस साल के संस्करण सबसे ज्यादा अमीर इंसान थे.


आइए जानते हैं उनकी चैरिटी के बारे में -

अगर आप दिल्ली शहर से हैं तो जनकपुरी में एक माता चन्न देवी हॉस्पिटल. यह नाम उनकी माता का है उन्होंने अपनी माता के नाम पर एक चैरिटेबल हॉस्पिटल खोला था और इसी हॉस्पिटल में महाशय धरमपाल गुलाटी जी ने 3 दिसंबर 2020 को आखिरी सांस ली.जैसा कि मैंने आपको पहले ही बताया था कि वह सबसे ज्यादा सैलरी लेते थे और वह उसी सैलरी का 90%दान किया करते थे.उन्होंने अपने पिताजी के नाम महाशय चुन्नी लाल ट्रस्ट से काफी जरूरतमंद लोगों की हेल्प करी.और यह मोबाइल हॉस्पिटल की तरह चलाता है यह लोग झुग्गी झोपड़ी वाले लोगों की बहुत सहायता करते हैं और उनकी सेवा करते हैं और इसी ट्रस्ट के नाम पर चार स्कूल भी है.


जब तक महाशय जी जिंदा है वह अपने काम को लेकर हमेशा ईमानदार रहें और उन्होंने कभी आलस नहीं करा हमेशा एक्टिव रहते थे.अगर होने कभी-कभी छुट्टी वाले दिन भी काम आ जाता था तो वह हमेशा करते थे उनके पास अपनी एमडीएच कंपनी के 80% शेयर थे.

मसालों के महाराजा की कहानी 

नोट-जैसा कि आपने देखा महाशय जी ने कितनी मेहनत करके आज इतना बड़ा नाम कमा लिया अगर ऐसे ही आप अपना इंस्टाग्राम या फेसबुक का यूज करकेपैसा कमाना चाहते हैं या घर बैठे बैठे हैं खुद के मालिकबनना चाहते हैं तो आप मुझे मेरे इंस्टाग्राम पर मैसेज करिए मैं आपको सब बताऊंगी कि आप को कैसे यूज करके क्या करना है.


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