Narendra giri biography | mahant narendra giri wiki, death, death reason,narendra giri sucide not

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नरेंद्र गिरी बायोग्राफी :-

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पूरा नाम-महंत नरेंद्र गिरि

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उपनाम- नरेंद्र 

आयु-71 वर्ष

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जन्मतिथि-1 मार्च 1949

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जन्म स्थान-छितौनी प्रयागराज उत्तर प्रदेश {भारत}

भूमिका-संत

महंत-बागांबरी  मठ (समुदाय)

गृह नगर-प्रयागराज उत्तर प्रदेश {भारत}

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अध्यक्षता-अखिल भारतीय अखाड़ा संगठन

सचिव-निरंजनी अखाड़ा

कार्यकाल-लगभग 16 वर्ष (2005 से 2021)

आंदोलन-राम जन्मभूमि

योग्यता-स्नातक

सन्यासी बनना -12वीं कक्षा उत्तीर्ण के बाद

राष्ट्रीयता-भारतीय 

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स्थिति-अविवाहित

माता पिता की संताने-दो भाई एक बहन

पद ग्रहण-1 मार्च 2015, 1 मार्च 2019।

पुजारी_बड़ा हनुमान मंदिर संगम नदी के किनारे पर उत्तर प्रदेश  {भारत}

अखिल भारतीय अखाड़ा स्थापना-सन 1954

अंतर्गत संस्था-13 अखाड़े

संस्थान कार्य-संतो  और महामंडलेश्वर सर्टिफिकेट जारी करना।

संस्था का उद्देश्य-सनातन हिंदू धर्म की रक्षा

सनातन धर्म स्थापना-आदि गुरु शंकराचार्य

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माता पिता की संताने-दो भाई एक बहन

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मृत्यु की तिथि-20 अगस्त 2021

मृत्यु का स्थान-बागांबरी मठ प्रयागराज (उत्तर प्रदेश भारत)

मृत्यु का कारण-हत्या (आत्महत्या)

राशि-वृश्चिक

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धर्म -हिन्दु 

पसंदीदा गुरु-आदि गुरु शंकराचार्य

पसंदीदा शिष्य-योगानंद गिरी

पसंदीदा भोजन-शाकाहार 

प्रमुख शिष्य-आनंद गिरि


तो चलिए दोस्तों जानते हैं कि Narendra giri से महंत Narendra giri बनने का सफर किस प्रकार व्यतीत हुआ, और उनकी मृत्यु का षड्यंत्र है किस प्रकार रचा गया।

महंत Narendra giri का जन्म प्रयागराज छितौनी उत्तर प्रदेश भारत में 1 मार्च 1949 को हुआ।

महंतNarendra giri के माता पिता के कुल संतान थी।

उनमें से एक सबसे छोटे महंत नरेंद्र गिरि थे जिन्होंने 12वीं कक्षा उत्तरण के बाद छोटी सी उम्र में ही इस संसार के सभी रीति-रिवाजों और परिवार को त्याग करें सन्यासी बनने का निश्चय किया।

इसके बाद महंत Narendra giri अपने परिवार को छोड़कर सन्यासी बनने के लिए घर से निकल पड़े।

लगभग 10 वर्षों के बाद महंत Narendra giri का नाम एक बहुत बड़े संत के रूप में उभर कर आया।

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महंत  Narendra giri की कार्य प्रशासन की क्षमता को देखकर अखिल भारतीय अखाड़ा नाम के संगठन से जुड़े सदस्यों ने  नरेंद्र गिरि को 2015 की 1 मार्च को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया था। इस संगठन की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अंतर्गत कुल 13 sang सम्मिलित हैं ।

इन संस्थाओं का कार्य व उद्देश्य केवलसनातन धर्म की रक्षा और नए बने बाबाओं और मंडलेश्वर का सर्टिफिकेट (पहचान) जारी करना।

सनातन धर्म की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी उसी समय है बद्रीनाथ रामेश्वरम और जगन्नाथपुरी द्वारिका पीठ आदि की स्थापना भी की गई थी।



महंत Narendra giri का  मुख्य कार्य केवल आश्रम की कार्यप्रणाली शासन व्यवस्था को अनुशासित रखना और कुंभ मेले की की तैयारियों पर विचार करना।

तो आप जानते हैं महंत Narendra giri की मृत्यु हत्या थी या आत्महत्या अगर हत्या की गई तो यह षड्यंत्र किस प्रकार रचा गया।

महंत नरेंद्र गिरि ने अपने जीवन में बहुत से विवादों में गहनता से संबंध रखा। जिसमें कई बड़े बड़े नाम शामिल हैं। अब इनमें से सभी के पास महंत Narendra giri को मारने का कारण है ।

महंत नरेंद्र गिरि के द्वारा विवादों में संबंध निम्नलिखित है:-

प्रथम विवाद-इस विवाद में महंत Narendra giri ने अपने सबसे करीबी शिष्य आनंद गिरी को हरिद्वार कुंभ में घटित किसी घटना के कारण संघ से निकाल दिया। इसके पीछे कारण है कि आनंद गिरिअपने परिवारिक संबंधों के चलते धन का दुरुपयोग कर रहे थे जिसके कारण महंत Narendra giri ने आनंद giri को आश्रम के साथ-साथ मंदिर में प्रवेश पर भी निषेध कर दिया।

लेकिन बाद में 26 मई को लखनऊ उत्तर प्रदेश में आनंद गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि से क्षमा याचना मांगी। महंत ने अपने शिष्य को गलतियों पर पछतावा देखकर क्षमा कर दिया। लेकिन इसके बाद भी महंत Narendra giri ने आनंद गिरि पर कभी भी गहन भरोसा नहीं किया।

एक कहावत में कहा गया है कि अगर एक बार भरोसे को तोड़ दिया जाए तो उसके निशान हमेशा रहते हैं |


द्वितीय विवाद-  इस विवाद में महंत के शिष्य आशीष गिरी की मृत्यु संदिग्ध अवस्था में उनका शव 17 नवंबर 2019 को पेथरोड़गढ में मिला। तो इसका  सीधा शक महंत Narendra giri पर गया लेकिन सीबीआई जांच के बाद महंत बेगुनाह साबित हो गए।



तृतीय विवाद-इसी विवाद में महंत ने महेश नारायण सिंह सपा विधायक से भूमि को लेकर विवाद किया ।


चतुर्थ विवाद-इस विवाद में महंत पर आरोप लगाया गया कि मंदिर के धन का दुरुपयोग किया जा रहा है और इस धन को मदिरा बार में काम कर रही बालिकाओं पर है धन उड़ाया जा रहा है। जब इस पर जांच हुई तो पाया गया कि वह महंत नहीं बल्कि उनके ही मंदिर समिति के सदस्य थे।

इसी विवाद में एक और बात सामने आई कि महंत विवाह में मंत्रोचार के बीच भी रुपए उड़ा रहे थे।

लेकिन जब इस बात की जांच हुई तो निष्कर्ष निकला कि महंत का करें केवल दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद देना था।


पंचम विवाद-इस विवाद में महंत पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने क्यों एक मदिरा संचालक को महामंडलेश्वर बनाया-जिसका नाम सचिन दत्ता मंडलेश्वर बनने के बाद सच्चिदानंद रखा गया यह घटना 31 जुलाई 2015 की है।



षष्टम विवाद-इस विवाद में महंत के घर पर है उनकी सालाना आय से अधिक जमीन जायदाद  होने पर आरोप लगाया गया। गनर का नाम अजय सिंह के द्वारा ठाट बाट से रहने पर लगाया गया। जिसकी जांच के लिए आरटीआई अधिकारी नूतन कुमार ने डीजीपी व अन्य अधिकारियों से जांच की गुहार लगाई।


सप्तम विवाद-इस विवाद में महंत के द्वारा किन्नरों के लिए अखाड़ा को मान्यता ना देने पर  लगाया गया क्योंकि महंत का मानना था कि आदि गुरु शंकराचार्य ने केवल कुल 13 अखाड़े ही बनाए हैं 14वें को मान्यता नहीं दी है।

हालांकि बाद में 13 अक्टूबर 2015 को उज्जैन में किन्नरों का अखाड़ा बना दिया गया।

अष्टम विवाद-इस विवाद में महंत के द्वारा परी अखाड़ा न  बनाने मैं मान्यता न देने पर लगाया गया । क्योंकि महंत नरेंद्र गिरि का कहना था कि जिस त्रिकाल भगवंता ने जान  दीक्षा न ली है, जो सन्यासी नहीं है, यह नियमों के विरुद्ध हैं। त्रिकाल भगवंता शुरू से लेकर अब तक महिला सन्यासियों के लिए परी अखाड़ा जैसे संगठन तैयार कर रही है।


नवम विवाद-इस विवाद में महंत पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने 18 अगस्त 2018 को योगी सत्यम का फर्जी संतो की सूची में डाल दिया है। इससे नाराज होकर सत्यम ने विरुद्ध एफ आई आर दर्ज करवाई।



दशम विवाद-इसी विवाद में महंत Narendra giri पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने बागांबरी मठ की जमीन डीआईजी आर एन  सिंह को बेच कर मुकर गए।

इससे नाराज होकर आरएन सिंह ने मंदिर के बाहर धरना प्रदर्शन भी किया।



अब 2019 में प्रयागराज मेले में महंत की महत्वपूर्ण भूमिका रही उनके अनुसार ही सारी व्यवस्था को संभाला गया। जिसमें अखाड़ा कब स्नान करेगा कुंभ व अर्ध कुंभ की सुविधाएं कुंभ मेला कब लगेगा शासन प्रशासन का मार्गदर्शन अधिकारियों की बागडोर महंत के हाथ में थी।


मृत्यु कब और कैसे -दोस्तों महंत Narendra giri की मृत्यु 20 अगस्त 2021 को बागांबरी मठ प्रयागराज उत्तर प्रदेश भारत में हुई। सूचना के अनुसार महंत के पास एक आत्महत्या पत्र भी मिला है-और महंत का सॉन्ग बागांबरी मठ प्रयागराज में फंदे से लटका हुआ बरामद हुआ है।

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इस आत्महत्या पत्र में लिखा गया है कि:-

 

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मैं महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या करने जा रहा हूं। यह कार्य में 13 अगस्त को भी कर सकता था पर उस दिन मेरी हिम्मत नहीं हुई, मेरी आत्महत्या की वजह है कि मेरे शिष्य आनंद गिरी का समाचार मिला था कि वह कंप्यूटर सिस्टम की मदद से किसी लड़की के साथ मेरे द्वारा दुष्कर्म करने की तस्वीर बनाकर वह वायरल कर देगा।

मैंने बहुत सोच विचार कर यह मार्ग चुना है क्योंकि में एक बार बदनाम हो चुका हूं । मैं दोबारा से बदनाम होना नहीं चाहता और मैं अपने अनुयायियों को क्या सफाई दूंगा इसलिए आज मैं आत्महत्या कर रहा हूं।


                    हस्ताक्षर -महंत नरेंद्र गिरि


अभी तक उनकी मृत्यु का कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है परंतु महंत के आश्रम के सदस्यों वअनुयायियों ने मृत्यु का शक  आनंद गिरि पर जताया है।

और पुलिस ने आनंद गिरी को ऑस्ट्रेलिया विदेश से गिरफ्तार कर लिया है।

महंत नरेंद्र गिरी  के बड़े भाई ने इस मामले की जांच के लिए सीबीआई को आमंत्रित किया है।



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